संस्था का इतिहास, क्यों बनाई गई?

बुन्देलखण्ड कला संस्कृति मंच की स्थापना उस समय की गई जब बुन्देलखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे आधुनिकता की भीड़ में खोती जा रही थी। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य, बुन्देलखण्डी भाषा और स्थानीय कलाकारों की अनूठी अभिव्यक्तियाँ समय के साथ उपेक्षित होने लगी थीं।

इन्हीं चिंताओं के बीच कुछ संस्कृतिप्रेमी कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सामूहिक संकल्प लिया—बुन्देलखण्ड की कला और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उसकी मौलिकता को सुरक्षित रखने का। इसी उद्देश्य से मंच की नींव रखी गई।

स्थापना के शुरुआती वर्षों में संस्था ने गाँव-गाँव घूमकर लोककलाकारों को जोड़ा, उनकी कला को संजोया और उन्हें मंच प्रदान करने के लिए छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए। धीरे-धीरे यह प्रयास एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन बन गया, जिसमें बुन्देलखण्ड ही नहीं, देश के विभिन्न हिस्सों के लोग जुड़ते चले गए।

आज मंच लोककला संरक्षण, सांस्कृतिक प्रशिक्षण, डिजिटल दस्तावेज़ीकरण और राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के माध्यम से बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत रखने के लिए निरंतर कार्यरत है।


🌟 संस्था क्यों बनाई गई? (Why the Organization Was Formed)

संस्था की स्थापना तीन प्रमुख कारणों को ध्यान में रखते हुए की गई:

1. सांस्कृतिक विरासत को बचाने की आवश्यकता

बुन्देलखण्ड की पारंपरिक कलाएँ—लोकगीत, राई-रईना, दीवारी, नौटंकी, आल्हा, पेंटिंग, शिल्प—लुप्त होने की कगार पर थीं। उनका संरक्षण और पुनर्जीवन अत्यंत आवश्यक था।

2. स्थानीय कलाकारों को अवसर और पहचान देना

बहुत से प्रतिभाशाली कलाकार संसाधनों और मंच की कमी के कारण अपने क्षेत्र में ही सीमित रह जाते थे। संस्था का उद्देश्य उन कलाकारों को सही दिशा, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच का अवसर देना था।

3. युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना

नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही थी। संस्था को विश्वास था कि संस्कृति केवल इतिहास नहीं—बल्कि समाज की पहचान है। इसलिए मंच युवाओं को परंपरा और कला से जोड़कर समाज में सांस्कृतिक गर्व की भावना विकसित करना चाहता है।


📌 उद्देश्यों का विस्तृत विवरण

1. लोककला और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

  • बुन्देलखण्ड की लोककलाएँ—जैसे राई-रईना, दीवारी, आल्हा गान, नौटंकी, बृहद चित्रकला, लोकवाद्य, लोककथाएँ और पारंपरिक हस्तशिल्प—तेजी से विलुप्त होने की कगार पर हैं।
  • संस्था इन कलाओं का संग्रह, दस्तावेज़ीकरण, शोध एवं संरक्षण करती है ताकि यह मूल्यवान धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे।
  • मंच ग्रामीण कलाकारों से सीधी बातचीत, गाँव-स्तरीय सर्वेक्षण और परंपराओं का डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर संरक्षण कार्य को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाता है।

2. कलाकारों को मंच और अवसर प्रदान करना

बुन्देलखण्ड के कई कलाकार योग्यता और प्रतिभा के बावजूद उचित मंच, मार्गदर्शन और संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। संस्था का उद्देश्य है कि:

  • स्थानीय कलाकारों को राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति का अवसर मिले।
  • उनकी कला को पहचान, सम्मान और प्रोत्साहन प्राप्त हो।
  • आर्थिक अवसर बढ़ें ताकि कलाकार अपनी कला को पेशेवर रूप में आगे बढ़ा सकें।

इसके लिए संस्था प्रदर्शनियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों और प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है।

3. प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और कौशल-विकास कार्यक्रम

मंच युवा पीढ़ी को पारंपरिक कला सीखने और आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। इनमें शामिल हैं:

  • लोकनृत्य व लोकगीत प्रशिक्षण
  • चित्रकला एवं हस्तशिल्प वर्कशॉप
  • लोकवाद्य वादन प्रशिक्षण
  • रंगमंच एवं नाट्य कार्यशालाएँ

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बुन्देलखण्ड की कला को युवाओं में जीवित रखना और उन्हें कौशल आधारित रोजगार से जोड़ना है।

4. बुन्देली भाषा और साहित्य का प्रसार

संस्था का एक प्रमुख लक्ष्य है कि बुन्देलखण्डी भाषा को सम्मान, पहचान और बढ़ावा मिले। इस उद्देश्य के अंतर्गत:

  • बुन्देलखण्डी साहित्य, कविता, लोककथाओं का प्रकाशन
  • भाषा-संरक्षण अभियान
  • मंचीय प्रदर्शन, कवि-सम्मेलन और रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि भाषा का प्रसार और संरक्षण हो सके।

5. सांस्कृतिक जागरूकता और समाज को जोड़ना

संस्कृति केवल कला नहीं—बल्कि समाज का चरित्र है। इसलिए संस्था स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक संस्थाओं के साथ मिलकर:

  • सांस्कृतिक जागरूकता
  • लोक परंपराओं के प्रति सम्मान
  • और समुदाय की भागीदारी को बढ़ाने का कार्य करती है।

उद्देश्य है कि लोग अपनी परंपराओं पर गर्व करें और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

6. सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism) को बढ़ावा देना

बुन्देलखण्ड की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है। संस्था का प्रयास है कि:

  • सांस्कृतिक उत्सवों के माध्यम से पर्यटन को प्रोत्साहन मिले।
  • कलाकारों और शिल्पकारों को पर्यटन के माध्यम से बेहतर आर्थिक अवसर प्राप्त हों।
  • स्थानीय कला, खानपान और इतिहास को पर्यटन से जोड़कर क्षेत्र का समग्र विकास हो।

7. डिजिटल माध्यमों से सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुँचाना

डिजिटल युग में संस्था का उद्देश्य है कि बुन्देलखण्ड की कला और संस्कृति:

  • डॉक्यूमेंट्री
  • सोशल मीडिया
  • वेबसाइट
  • ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से विश्व स्तर पर पहुँचे।

इससे कलाकारों को नई ऑडियंस मिलती है और कला के प्रचार-प्रसार में तेजी आती है।